लीलाधर’ भगवान श्रीकृष्ण
‘ लीलाधर’ भगवान श्रीकृष्ण श्रीकृष्ण को कुछ लोग भगवान, तो कुछ लोग महामानव के रूप में स्वीकार करते हैं। सनातन धर्म को मानने वालों ने श्रीकृष्ण को भगवान के रूप में अपनाया है तो अन्य लोगों ने उन्हें महामानव की संज्ञा दी है। श्रीकृष्ण ने हमें मानवीय मूल्यों से परिचित कराने के लिए एक ऐसा ग्रंथ दिया, जो वास्तव में अद्वितीय है। श्रीमद्भभगवतगीता को मानवतावादी पुस्तक का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि इस देववाणी में मानव के मस्तिष्क में आने वाले हर एक प्रश्न का उत्तर मिल जाता है। व्यक्ति उपदेशों से नहीं अपितु अपने कर्मों से महान बनता है। यदि हम श्रीकृष्ण को एक मानव के रूप में देखें तो उनमें ईश्वरीय गुण अवश्य देखने को मिल जाएगें। श्रीकृष्ण को परिभाषित करने या फिर उन्हें जगत के अन्य मनुष्यों से सर्वश्रेष्ठ दर्शाने वाले गुण- महायोगी- श्रीकृष्ण महायोगी थे। महायोगी का अर्थ उस व्यक्ति से होता है, जिसने काम को जीता हो। लोगों को संदेह रहता है कि हजारों पत्नियों के रहते वे महायोगी कैसे हो सकते हैं? ‘ काम,...